24 Jun 2026

June 24, 2026

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) Season: 2026-27

" कैबिनेट ने मार्केटिंग सीज़न 2026-27 के लिए खरीफ़ फ़सलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को मंज़ूरी दी। "

 

" प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने मार्केटिंग सीज़न 2026-27 के लिए 14 खरीफ़ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंज़ूरी दे दी है। "
सरकार ने किसानों को उनकी उपज (Yield) का अच्छा दाम दिलाने के लिए मार्केटिंग सीज़न 2026-27 के लिए खरीफ़ फ़सलों का MSP बढ़ा दिया है। पिछले साल के मुकाबले MSP में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी सूरजमुखी (Sunflower) के बीज (₹622 प्रति क्विंटल) के लिए करने की सिफ़ारिश की गई है, इसके बाद कपास (Cotton) (₹557 प्रति क्विंटल), नाइजरसीड (Nigerseed) (₹515 प्रति क्विंटल) और तिल (Sesamum) (₹500 प्रति क्विंटल) का नंबर आता है।

22 Jun 2026

June 22, 2026

खेत बचाओ अभियान (Khet Bachao Abhiyan)

अभी हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री (Union Minister of Agriculture & Farmers' Welfare and Rural Development) [Shree Shivraj Singh Chouhan] ने मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले के रामसिया गाँव से खेत बचाओ अभियान का राष्ट्रीय स्तर पर शुभारंभ किया। 

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🌻यह अभियान मुख्यतः मृदा की गुणवत्ता को बनाए रखनेरासायनिक उर्वरकों (Chemical fertilizers) और कीटनाशकों (Pesticides) के अत्यधिक उपयोग को कम करने तथा वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों (Scientific agricultural practices) को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है। यह अभियान जून से 30 जून, 2026 तक पूरे देश में संचालित किया जाएगा। 

👉 Key activities: यह अभियान मृदा परीक्षण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, संतुलित पोषक प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, उन्नत बीजों का उपयोग, बीज उपचार, हरी खाद, आधुनिक बुआई तकनीक और जल-संरक्षण आधारित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देता है। 

👉 Scheme-related: यह अभियान नकली उर्वरकों (Spurious fertilizers), बीजों (Seeds) और कीटनाशकों के खिलाफ जागरूकता भी बढ़ाएगा, साथ ही किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)फसल बीमा योजनाकिसान क्रेडिट कार्ड (KCC) तथा कृषि यंत्रीकरण कार्यक्रम जैसी सरकारी योजनाओं (Government schemes) का लाभ प्राप्त करने में सहायता करेगा।

👉 Main message: यह अभियान “मिट्टी बचाओ, खेती बचाओ, किसान बचाओ” की अवधारणा (concept) पर आधारित है। यह इस  बात पर ज़ोर देता है कि मृदा की गुणवत्ता (Soil quality) ही उत्पादक कृषि, सशक्त किसानों और दीर्घकालिक राष्ट्रीय समृद्धि (Long-term national prosperity) की मूल आधारशिला है।

👉 Soil Health Card: ह अभियान मृदा स्वास्थ्य कार्ड के उपयोग को बढ़ावा देता है ताकि उर्वरकों (Fertilizers) का प्रयोग मृदा की वास्तविक पोषक आवश्यकताओं के आधार पर किया जा सके। इससे कृषि लागत कम करने, उत्पादकता (Productivity) बढ़ाने और मृदा की उर्वरता बनाए रखने में सहायता मिलती है। 

👉 ग्राम स्तर पर संपर्क: कृषि वैज्ञानिकभारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR ), कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञकृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विभाग के अधिकारी तथा जनप्रतिनिधि गाँवों का दौरा करेंगे ताकि किसानों को शिक्षित किया जा सके और उन्हें तकनीकी सहायता प्रदान की जा सके।

👉 Scientific Agriculture: इस अभियान के अंतर्गत सोयाबीन (Soyabean), धान (Rice) और दलहनों (Pulses) जैसी फसलों के लिये खेत स्तर पर प्रदर्शन किये जाएंगे। किसानों को लेजर लेवलर (Laser Leveler) [Land leveling technology] के उपयोग, स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुसार फसल चयन (Crop Selection) तथा जल-संरक्षण आधारित कृषि पद्धतियों (Agricultural practices) का प्रशिक्षण दिया जाएगा। 


Khet Bachao Abhiyan FAQs

1. Khet Bachao Abhiyan क्या है?

उत्तर: Khet Bachao Abhiyan एक जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी कृषि भूमि, मिट्टी की उर्वरता, जल संसाधनों और फसलों की सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है। इसके माध्यम से टिकाऊ (Sustainable) खेती को बढ़ावा दिया जाता है।

2. Khet Bachao Abhiyan का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इस अभियान का मुख्य उद्देश्य कृषि भूमि को बंजर होने से बचाना, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखना, जल संरक्षण को बढ़ावा देना और किसानों की आय में सुधार करना है।

3. Khet Bachao Abhiyan की आवश्यकता क्यों पड़ी?

उत्तर: लगातार बढ़ते भूमि क्षरण, रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग, जल की कमी और पर्यावरणीय समस्याओं के कारण इस प्रकार के अभियानों की आवश्यकता महसूस की गई।

4. Khet Bachao Abhiyan से किसानों को क्या लाभ मिलता है?

उत्तर: इस अभियान के माध्यम से किसानों को बेहतर खेती तकनीक, जल संरक्षण, जैविक खेती और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के उपायों की जानकारी मिलती है, जिससे उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि हो सकती है।

5. मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए क्या करना चाहिए?

उत्तर: किसानों को जैविक खाद का उपयोग करना चाहिए, फसल चक्र (Crop Rotation) अपनाना चाहिए और मिट्टी परीक्षण (Soil Testing) समय-समय पर करवाना चाहिए।

6. Khet Bachao Abhiyan में जल संरक्षण का क्या महत्व है?

उत्तर: जल संरक्षण खेती के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ड्रिप इरिगेशन, वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और उचित सिंचाई तकनीकों के उपयोग से पानी की बचत की जा सकती है।

7. क्या जैविक खेती (Organic Farming) Khet Bachao Abhiyan का हिस्सा है?

उत्तर: हां, जैविक खेती को बढ़ावा देना इस अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, क्योंकि इससे मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रहते हैं।

8. फसल चक्र (Crop Rotation) क्या है और यह क्यों जरूरी है?

उत्तर: फसल चक्र का अर्थ है अलग-अलग मौसम में विभिन्न प्रकार की फसलें उगाना। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और कीट एवं रोगों का खतरा कम होता है।

9. Khet Bachao Abhiyan में आधुनिक तकनीक की क्या भूमिका है?

उत्तर: आधुनिक तकनीक जैसे ड्रिप इरिगेशन, Soil Testing, स्मार्ट फार्मिंग और उन्नत बीजों का उपयोग करके खेती को अधिक लाभदायक और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

10. किसान Khet Bachao Abhiyan में कैसे योगदान दे सकते हैं?

उत्तर: किसान जल संरक्षण, जैविक खाद का उपयोग, मिट्टी परीक्षण, फसल चक्र अपनाने और पर्यावरण-अनुकूल खेती पद्धतियों को अपनाकर इस अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

 

21 Jun 2026

June 21, 2026

जायद फसलें (Zaid Crops)

जायद फसलें (Zaid Crops) वे मौसमी फसलें होती हैं, जिन्हें भारत में मुख्य रूप से गर्मी के मौसम (Summer Season) में उगाया जाता है। इन फसलों की बुवाई (Sowing) सामान्यतः मार्च से अप्रैल के बीच की जाती है और इनकी कटाई (Harvesting) जून से जुलाई के दौरान की जाती है। जायद फसलें रबी और खरीफ फसलों के बीच के समय में उगाई जाती हैं, इसलिए इन्हें एक अंतरिम या अतिरिक्त फसल (Intermediate Crop) भी माना जाता है।

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भारत में जायद फसलों की खेती उन क्षेत्रों में अधिक की जाती है, जहां सिंचाई (Irrigation) की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध होती है। इन फसलों के लिए गर्म तापमान (High Temperature), शुष्क जलवायु (Dry Climate) और पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है।

भारतीय कृषि प्रणाली के अनुसार, जायद फसलों की श्रेणी में तरबूज (Watermelon), खरबूजा (Muskmelon), खीरा (Cucumber), ककड़ी (Long Melon), लौकी (Bottle Gourd), करेला (Bitter Gourd), तुरई (Ridge Gourd), मूंग (Moong), उड़द (Urad) तथा कुछ चारा फसलें (Fodder Crops) शामिल की जाती हैं।

भारत में जायद फसलों का मौसम सामान्यतः मार्च महीने से शुरू होकर जून या जुलाई तक चलता है। इन फसलों की कटाई गर्मियों के अंत में की जाती है। जायद सीजन की प्रमुख फसलों में तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, मूंग और उड़द शामिल हैं।

मौसमी वर्गीकरण (Seasonal Classification) के आधार पर जायद फसलों को कई प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है

🌾 खाद्य फसलें (Food Crops)
🍅 सब्जी फसलें (Vegetable Crops)
🍎 फल फसलें (Fruit Crops)
🌱 चारा फसलें (Fodder Crops)
🌿 दलहन फसलें (Pulse Crops)
🌰 व्यावसायिक फसलें (Commercial Crops)

जायद फसलों में तरबूज (Watermelon), खरबूजा (Muskmelon), खीरा (Cucumber) और मूंग (Moong) जैसी फसलें किसानों के लिए अतिरिक्त आय (Additional Income) का एक महत्वपूर्ण स्रोत मानी जाती हैं। इन फसलों की मांग गर्मियों के मौसम में अधिक रहती है, जिससे किसानों को अच्छा लाभ प्राप्त होता है।

आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों और उचित सिंचाई व्यवस्था के उपयोग से जायद फसलों की पैदावार और गुणवत्ता में लगातार सुधार हो रहा है। इसलिए भारतीय कृषि में जायद फसलों का विशेष महत्व है और ये किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। 

June 21, 2026

रबी फसलें (Rabi Crops)

रबी फसलें (Rabi Crops) वे मौसमी फसलें होती हैं, जिन्हें भारत में मुख्य रूप से सर्दियों के मौसम (Winter Season) में बोया जाता है और वसंत ऋतु (Spring Season) में उनकी कटाई की जाती है। "रबी" शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के शब्द "Spring" से हुई है, जिसका अर्थ वसंत ऋतु होता है। भारतीय उपमहाद्वीप में इन्हें वसंतकालीन फसलें (Spring Crops) या शीतकालीन फसलें (Winter Crops) भी कहा जाता है।







भारतीय कृषि प्रणाली के अनुसार, रबी फसलों में गेहूं (Wheat), जौ (Barley), जई (Oats), चना (Gram/Chana), अलसी (Linseed), लहसुन (Garlic), जीरा (Cumin), धनिया (Coriander) तथा सरसों (Mustard) जैसी प्रमुख फसलें शामिल की जाती हैं।

भारत में रबी फसलों की बुवाई (Sowing) सामान्यतः अक्टूबर से दिसंबर के बीच की जाती है, जबकि इनकी कटाई (Harvesting) मार्च से अप्रैल के दौरान की जाती है। गेहूं, सरसों और मटर (Peas) जैसी प्रमुख रबी फसलों की कटाई वसंत ऋतु की शुरुआत में की जाती है।

रबी सीजन की मुख्य फसलों में गेहूं, जौ, जई, चना, अलसी और सरसों प्रमुख रूप से शामिल हैं। ये फसलें कम तापमान और अपेक्षाकृत शुष्क जलवायु में अच्छी पैदावार देती हैं।

मौसमी वर्गीकरण (Seasonal Classification) के आधार पर रबी फसलों को कई प्रमुख श्रेणियों में बांटा जा सकता है

🌽 खाद्य फसलें (Food Crops)
🌿 चारा फसलें (Fodder Crops)
🍁 रेशेदार फसलें (Fiber Crops)
🌸 तिलहन फसलें (Oil Crops)
🌴 सजावटी फसलें (Ornamental Crops)
🌱 दलहन फसलें (Pulses Crops)

रबी फसलों में गेहूं (Wheat), जौ (Barley) और चना (Gram) जैसी खाद्य फसलें भारत के कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। ये फसलें देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उचित सिंचाई, उन्नत बीजों और आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से रबी फसलों की उत्पादकता में लगातार वृद्धि हो रही है।

June 21, 2026

खरीफ फसलें (Kharif Crops)

खरीफ फसलें (Kharif Crops) वे मौसमी फसलें होती हैं, जिन्हें भारत में मुख्य रूप से मानसून के मौसम (Monsoon Season) के दौरान उगाया जाता है। यह मौसम आमतौर पर जून महीने में शुरू होता है और सितंबर तक चलता है। इस दौरान भारत में उच्च तापमान (High Temperature), पर्याप्त वर्षा (Rainfall) और अधिक आर्द्रता (Humidity) जैसी जलवायु परिस्थितियां पाई जाती हैं, जिनके अनुसार खरीफ फसलें अच्छी तरह विकसित होती हैं।















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भारतीय कृषि प्रणाली और खरीफ फसलों के मौसम के अनुसार, इस श्रेणी में धान (Rice), मक्का (Maize), ज्वार (Jowar), बाजरा (Millet/Bajra), रागी (Ragi), अरहर (Tur), सोयाबीन (Soybean), मूंगफली (Groundnut), कपास (Cotton), मूंग (Moong) आदि प्रमुख फसलें शामिल हैं।

भारत में खरीफ फसलों का मौसम सामान्यतः जून महीने से शुरू होकर अक्टूबर तक चलता है। इन फसलों की कटाई (Harvesting) मानसून के समाप्त होने के बाद, यानी अक्टूबर या नवंबर महीने में की जाती है। खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों में धान, मूंग दाल, बाजरा, उड़द और मक्का शामिल हैं।

मौसमी वर्गीकरण (Seasonal Classification) के आधार पर खरीफ फसलों को छह प्रमुख श्रेणियों में बांटा जा सकता है

🌾 खाद्य फसलें (Food Crops)
🍂 रेशेदार फसलें (Fiber Crops)
🍁 चारा फसलें (Fodder Crops)
🎪 औद्योगिक फसलें (Industrial Crops)
🌷 तिलहन फसलें (Oilseed Crops)
🌵 दलहन  फसलें (Pulses Crops)

विश्व की सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसलों (Food Crops) में अनाज (Grains), मक्का (Maize), गेहूं (Wheat) और चावल (Rice) को शामिल किया जाता है। ये फसलें दुनिया भर में करोड़ों लोगों के भोजन का मुख्य स्रोत हैं और कृषि क्षेत्र में इनका विशेष महत्व है।

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